तिरुवनंतपुरम/नई दिल्ली : प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को सबरीमाला मंदिर की संपत्तियों और सोने के गबन (Misappropriation of Assets) के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में कुल 21 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई मंदिर के गर्भगृह (Sreekovil) और द्वारपालक की मूर्तियों से जुड़े सोने की चोरी के आरोपों को लेकर की जा रही है।क्या है पूरा मामला? जांच का मुख्य केंद्र वह सोना है जो 1998 में मंदिर को दान दिया गया था। आरोप है कि मंदिर के 'श्रीकोविल' (गर्भगृह) के दरवाजे और 'द्वारपालक' की मूर्तियों पर चढ़ाए गए सोने की परत को धीरे-धीरे तांबे की प्लेटों से बदल दिया गया। ED के सूत्रों के मुताबिक, 2019 से 2025 के बीच इन पवित्र आभूषणों को आधिकारिक रिकॉर्ड में जानबूझकर "तांबे की प्लेट" (Copper Plates) के रूप में दर्ज किया गया और असली सोना वहां से गायब कर दिया गया।किन पर है ED की नजर? ED की कोच्चि जोनल टीम ने जिन ठिकानों पर छापेमारी की है, उनमें इस घोटाले के मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोटी (Unnikrishnan Potti), त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) के पूर्व अध्यक्ष ए. पद्मकुमार और कई बड़े सर्राफा व्यापारी शामिल हैं। यह छापेमारी आरोपियों के आवास और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर की गई है ताकि अपराध से अर्जित आय (Proceeds of Crime) का पता लगाया जा सके।केरल पुलिस और ED की समानांतर जांच यह मामला पहले से ही केरल पुलिस की विशेष जांच दल (SIT) के पास है, जिसने कई FIR दर्ज की थीं। SIT ने अपनी जांच में इसे एक "गहरी आपराधिक साजिश" बताया था। अब ED ने इसी आधार पर 9 जनवरी, 2026 को मामला दर्ज कर वित्तीय अनियमितताओं की जांच तेज कर दी है। आरोप है कि चोरी किए गए सोने को रासायनिक प्रक्रियाओं (Chemical Processes) के जरिए गलाकर निजी फायदे के लिए बेचा गया।