जयपुर : गुलाबी नगरी में आयोजित जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) 2026 के मंच पर प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु और मोटिवेशनल स्पीकर गौर गोपाल दास ने जीवन और मृत्यु के गहरे दर्शन को अपने अनूठे और सरल अंदाज में साझा किया। जब आध्यात्मिक गुरु गौर गोपाल दास पहुंचे, तो पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा। उन्होंने कहा कि हम अक्सर मृत्यु से डरते हैं, लेकिन वास्तव में "मौत बेवजह बदनाम है, असली तकलीफ तो जिंदगी की उलझनों से है।" अपनी गहरी सूझबूझ और हास्य के मिश्रण के साथ उन्होंने आधुनिक जीवन की चुनौतियों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा कि इंसान मृत्यु के विचार से भयभीत रहता है, जबकि मृत्यु तो केवल एक विश्राम है; असली संघर्ष तो उस जीवन में है जिसे हम बोझ बनाकर जी रहे हैं।परेशान करने वाले बोझ को छोड़ें :-गौर गोपाल दास ने जोर देकर कहा कि हमारी मानसिक शांति का सबसे बड़ा दुश्मन वह 'अतीत का बोझ' है जिसे हम बेवजह ढो रहे हैं। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए समझाया कि जैसे लंबी यात्रा में भारी सामान थका देता है, वैसे ही जीवन की यात्रा में नफरत, ईर्ष्या और पुरानी कड़वाहटें हमें आगे बढ़ने से रोकती हैं। उन्होंने युवाओं और साहित्य प्रेमियों को सलाह दी कि वे "Let Go" यानी 'छोड़ना' सीखें। जब आप अनावश्यक मानसिक बोझ को गिरा देते हैं, तभी आप जीवन के असली आनंद का अनुभव कर सकतेजिंदगी जीने का नया नजरिया :-भाषण के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि हम अक्सर बाहरी सफलताओं को खुशी का पैमाना मान लेते हैं, जबकि असली सुकून मन के भीतर है। उन्होंने कहा, "मौत तो एक बार आती है, लेकिन हम अपनी चिंताओं और नकारात्मक सोच के कारण हर रोज मरते हैं।" उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे वर्तमान में जिएं और अपने रिश्तों व स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें।सुकून ही असली कामयाबी :-सत्र के अंत में उन्होंने मंत्र दिया कि कामयाबी केवल बैंक बैलेंस या शोहरत नहीं है, बल्कि वह मानसिक अवस्था है जहाँ आप बिना किसी डर और बोझ के चैन की नींद सो सकें। उनके इस संबोधन ने जेएलएफ में आए हजारों लोगों को आत्म-चिंतन की प्रेरणा दी।