चेन्नई: तमिलनाडु विधानसभा में आज ,20 जनवरी, 2026 को साल के पहले सत्र की शुरुआत भारी हंगामे के साथ हुई। Governor RN Ravi ने डीएमके सरकार द्वारा तैयार किए गए पारंपरिक अभिभाषण को पढ़ने से साफ इनकार कर दिया और सदन से वॉकआउट कर गए। राज्यपाल ने आरोप लगाया कि सरकार के भाषण में "तथ्यात्मक गलतियां" हैं और कई दावे सच्चाई से कोसों दूर हैं।लोक भवन ने जारी किया 13-सूत्रीय स्पष्टीकरण सदन छोड़ने के कुछ ही मिनट बाद, राज्यपाल के कार्यालय (लोक भवन) ने एक 13-सूत्रीय नोट जारी कर वॉकआउट की वजह बताई। इसमें सबसे बड़ा हमला सरकार के 12 लाख करोड़ रुपये के निवेश के दावे पर किया गया है।निवेश के दावे पर सवाल: राज्यपाल ने कहा कि सरकार का यह दावा कि राज्य ने 12 लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित किया है, "सच्चाई से बहुत दूर" है। उन्होंने कहा कि अधिकांश MoUs केवल कागजों पर हैं और हकीकत में बहुत कम निवेश आया है।रैंकिंग में गिरावट: राज्यपाल के अनुसार, निवेश के आंकड़ों से पता चलता है कि निवेशकों के लिए तमिलनाडु का आकर्षण कम हो रहा है। राज्य FDI (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) प्राप्त करने में चौथे स्थान से गिरकर अब छठे स्थान पर संघर्ष कर रहा है।माइक बंद करने का आरोप राज्यपाल ने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि जब उन्होंने अपनी बात रखनी चाही, तो उनका माइक बार-बार बंद कर दिया गया, जिससे उन्हें बोलने नहीं दिया गया। इसके अलावा, उन्होंने राष्ट्रीय गान के अपमान और दलितों पर बढ़ते अत्याचार जैसे मुद्दों को भाषण में नजरअंदाज करने की भी बात कही।उधर, मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने राज्यपाल के इस कदम को "सदन की परंपराओं का अपमान" बताया और एक प्रस्ताव पारित कर सरकार के तैयार भाषण को ही 'पढ़ा हुआ' मान लिया गया।